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IIT Jodhpur Anthem

[This Hindi poem was a candidate for the anthem of the Indian Institute of Technology Jodhpur , my alma mater.] एक बूंद पुरानी बरखा की‚ मरूभूमि पर आ गिरी। रिमझिम, बरस पड़ी। एक नई सोच शिक्षा की‚ भोर-किरण उजियारे की‚ एक अविरल धारा चल निकली॥ ज्ञान की सजग निगाहों का– विज्ञान की नित नई राहों का– उत्सुक तन्मय आँखों का– एक नया सवेरा जाग उठा॥ उलझे सामाजिक प्रश्नों का– बिखरे ज्ञान के दीपों का– यहाँ समागम उन प्रवाहों का– अनेकता में एकता का॥ उमंग है, आँखों में‚ जज़्बा कुछ कर गुज़रने का। मंज़िल है, सपना है‚ कल को बदलने का॥ एक बूंद पुरानी बरखा की‚ मरूभूमि पर आ गिरी। रिमझिम, बरस पड़ी। एक नई सोच शिक्षा की‚ भोर-किरण उजियारे की‚ एक अविरल धारा चल निकली॥